गौतमबुद्व पुलिस कमिश्नरेट: अफसरों की नाक के नीचे बड़ा खेल गए कर गए इंसपेक्टर
Navodaya TimesCrime Plus
नई दिल्ली, दिनेश शर्मा/ टीम डिजीटल: गौतमबुद्व पुलिस कमिश्नरेट में आईपीएस व पीपीएस अफसरों की फौज है। हर छोटी से छोटी घटना पर यह अफसर निगरानी रखने और निष्पक्ष कार्रवाई का दावा करते है लेकिन इसके बाद भी इन अफसरों की नाक के नीचे उनके मातहत इंसपेक्टर व उसकी टीम ऐस खेल कर गई कि लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से लेकर शासन स्तर पर अब इस खेल पर खेला होने लगा। एटीएम से कैश चोरी करने वाले गिरोह को पकडऩे के बजाए नोएडा पुलिस के तेज तर्राज माने लाने वाले इंसपेक्टर व उसकी टीम का ईमान बीस लाख रुपये और एक क्रेटा कार पर डोल गया। उन्हें पैसा और गाड़ी लेकर छोड़ दिया लेकिन तीन माह में ही उन्हीं अपराधियों ने नोएडा पुलिस की करतूत का खुलासा पडोसी जिले में पकड़े जाने पर कर दिया।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम् थाना पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में उन्होंने बताया कि तीन माह पहले नोएडा पुलिस ने उन्हें बीस लाख रुपये व क्रेटा कार के रूप में रिश्वत लेकर छोड़ दिया था, लिहाजा आप भी छोड़ दीजिए। मामला लखनऊ तक पहुंचने के बाद घटनाकी जांच नोएडा के डीसीपी क्राइम को सौंपी गई है। खास बात यह है कि नोएडा पुलिस के जिस अफसर को जांच को दी गई है। उसी अफसर के अधीन यह इंसपेक्टर व उसकी टीम थी। ऐसे में जांच की आंच केवल निचले स्तर पर ही रहेगी या उपर तक जायेगी यह भविष्य के गर्त में है। जिस टीम ने यह कारनामा किया है उसने कुछ माह पहले बिसरख क्षेत्र में ताबड़तोड़ गुडवर्क भी किए थे। इस गुडवर्को की तह पर अगर गंभीरता से जांच हो तो बड़े खुलासे हो सकते है। ग्रेटर नोएडा जोन में भी कुछ समय पूर्व हुए कई गुडवर्क में भी घालमेल हुआ लेकिन मामला विभागीय होने के चलते दब गया। थाना सेक्टर-20 में भी एक गांजा तस्कर की डीएलएफ चौकी क्षेत्र में हुई गिरफ्तारी के बाद भी गंभीर आरोप लगे लेकिन यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों के मुताबिक गाजियाबाद में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह काफी समय से दिल्ली-एनसीआर समेत तमाम प्रदेशों के एटीएम को निशाना बना रहे हैं। तीन महीने पहले नोएडा पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था, लेकिन छोडऩे के नाम पर नोएडा पुलिस के इंसपेक्टर व उनकी टीम की सौदेबाजी का खुलासा होते ही जिले के पुलिस अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से संपर्क किया और पूरे मामले से अवगत कराया। लखनऊ से फोन घनघनाने के बाद नोएडा पुलिस में हलचल मच गई। पहले मामला दबाने का प्रयास किया लेकिन गाजियाबाद व नोएडा पुलिस के बीच तालमेल के अभाव में बात नहीं बनी और अब आनन फानन में गौतमबुद्व नगर पुलिस कमिश्नरेट के अपर पुलिस आयुक्त लव कुमार ने भी इस प्रकरण की जांच डीसीपी क्राइम को सौंप दी है। अपर पुलिस आयुक्त लव कुमार के मुताबिक एटीएम काटने वाले गिरोह के आरोपियों को रिश्वत लेकर छोडऩे का मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच सौंपी गई है। जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज ने खोला नोएडा पुलिस का कारनामा एक एटीएम में वारदात की सीसीटीवी फुटेज इंदिरापुरम पुलिस के पास थी। इसमें गिरोह के सदस्य एक कार में बैठे दिखाई दिए थे। रविवार को पुलिस ने फुटेज के आधार पर चार आरोपियों को हिरासत में ले लिया। उनसे कार के बारे में पूछा तो पता चला कि यह कार नोएडा पुलिस के पास है। नोएडा पुलिस के पास यह कार कैसे पहुंची, यह पूछने पर आरोपियों ने बताया कि सिर्फ कार ही नहीं, उन्हें छोडऩे के नाम पर 20 लाख रुपये भी लिए गए। नोएडा पुलिस का कारनामा सामने आने के बाद अधिकारियों को इससे अवगत कराया गया।
50 लाख मांगे थे, 20 लाख में हुई सौदेबाजी पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि नोएडा क्राइम ब्रांच ने करीब 3 महीने पहले उन्हें पकड़ा था। इस दौरान आरोपियों से 10 लाख रुपये बरामद हुए थे। आरोपियों ने छोडऩे की गुहार लगाई तो नोएडा पुलिस ने 50 लाख रुपये की मांग की, लेकिन सौदेबाजी करते-करते हुए 20 लाख रुपये में डील हो गई। साथ ही, आरोपियों के ठिकाने पर दबिश देने के दौरान नोएडा पुलिस को वहां एक क्रेटा कार मिली, जिसे भी वह अपने साथ ले गई। इसी कार को ले जाते हुए पुलिस सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। बताया जा रहा है कि गाजियाबाद पुलिस ने यह फुटेज बरामद कर ली है।
डीजीपी मुख्यालय से हुए जांच के आदेश आरोपियों के कबूलनामे और नोएडा पुलिस की हकीकत उजागर करने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने डीजीपी मुख्यालय को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। जिसके बाद एडीजी इंटेलीजेंस ने जांच के आदेश दिए। जिसके बाद प्रदेश मुख्यालय पर नोएडा और गाजियाबाद पुलिस से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की गई है।
नोएडा-गाजियाबाद पुलिस की तकरार पुरानी गाजियाबाद और नोएडा पुलिस की तकरार बीते कई महीनों से चली आ रही है। नोएडा पुलिस के एक दरोगा ने साहिबाबाद के एक कारोबारी को बंधक बनाकर रकम वसूली थी। इस संबंध में साहिबाबाद पुलिस ने दरोगा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। वहीं, दूसरा मामला नोएडा में सामने आया। वहां के रहने वाले एक व्यक्ति ने इंदिरापुरम पुलिस पर खुद को अगवा करने और 12 घंटे अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया था। तीसरा मामला एटीएम कटर गिरोह का सामने आया है। इससे साफ जाहिर है कि गाजियाबाद और नोएडा पुलिस में तकरार बरकरार है। इससे पहले लोनी में शराब फैक्टरी पकडऩे जाने के बाद उस वक्त के तत्कालीन एसएसपी गाजियाबाद व नोएडा एसएसपी के बीच की रार महकमे में चर्चा का विषय रही थी।
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