शिवपाल बोले सपा को बड़ा बनाने में हमनें भी पसीना बहाया, भतीजे के सामने गठबंधन के लिए रखा यह फॉर्मूला

शिवपाल बोले सपा को बड़ा बनाने में हमनें भी पसीना बहाया, भतीजे के सामने गठबंधन के लिए रखा यह फॉर्मूला

Navodaya Times

Khabre

नई दिल्ली/टीम डिजीटल।अगर अखिलेश को लगता है कि हमने भी सपा को मजबूत करने में 25 फीसदी भी योगदान दिया है। तो हमें कम से कम 25 फीसदीं सीटें तो विधानसभा में दे। कभी समाजवादी पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे शिवपाल यादव यह तमाम बातें रविवार को नवयुग मार्केट स्थित एक रेस्त्रां में आयोजित प्रेसवार्ता में कर रहे थे। जहां उन्होंने आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति और तैयारियों को लेकर राय रखी।

सपा के सामने 75-25 का रखा फॉर्मूला प्रेसवार्ता के दौरान शिवपाल यादव से जब पूछा गया कि आगामी विधानसभा चुनावों में सपा के साथ उनकी जुगलबंदी की कितनी संभावनाएं हैं। उन्होंने जवाब दिया कि इन चुनावों में सपा के साथ 75-25 फॉमूले पर राजी हो सकते हैं। जिसमें 25 फीसदी सीटें उनकी होंगी। हालांकि वह यह भी जोड़ देते हैं कि प्रसपा जल्द ही एक राष्ट्रीय पार्टी के साथ गठबंधन की भी घोषणा कर सकती है।

परिवर्तन रथ पर सवार हैं शिवपाल यादव प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव सूबे में खुद को बरकरार रखने और पार्टी को स्थापित करने के लिए परिवर्तन यात्रा का आयोजन कर रहे हैं। जिसकी शुरूआत मथुरा से हुई थी। शनिवार को यह यात्रा गाजियाबाद पहुंची। इसके बाद रविवार को शिवपाल यादव ने मीडिया से बातचीत की। उनका कहना है कि अभी तक इस यात्रा के आधार पर कहा जा सकता है कि जनता परिवर्तन चाह रही है। जिसमें प्रसपा परिवर्तन में अहम भूमिका निभा सकती है।

जाति आधारित जनगणना की मांग की प्रेसवार्ता के दौरान रा’य व केन्द्र सरकार पर विभिन्न मुद्दों के तहत तमाम तरह के आरोप लगाने के अलावा शिवपाल यादव ने जाति आधारित जनगणना की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आज भी केंद्र सरकार की ग्रुप ए की नौकरियों में सवर्ण 68, ओबीसी 1&, एससी 1&, एसटी 6 प्रतिशत हैं। देश के 496 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों में 448 सवर्ण हैं। 4& केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 95 प्रतिशत प्रोफेसर, 92.9 प्रतिशत एसोसिएट प्रोफेसर, 66.27 प्रतिशत एसिसटेंट प्रोफेसर सवर्ण हैं। इसलिए सरकार से यह मांग है कि सरकारी नौकरियों में सही मंशा और ईमानदारी के साथ दलितों-पिछड़ों को प्रतिनिधित्व मिले और बैकलॉग के जरिए सभी खाली सीटें भरी जाएं। इसके अलावा जाति आधारित जनगणना हो। ताकि सभी जातियों का सटीक आंकडा सरकार के पास हो। इसकी मदद से सरकार वंचितों तक लाभ पहुंचा सकती है।

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