दिल्ली विधानसभा में पारित हुआ जीएसटी संशोधन विधेयक, जानें क्या होंगे मुख्य बदलाव
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल।दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को दिल्ली वस्तु एवं सेवा कर(संशोधन) विधेयक 2021 को पारित किया। इस दौरान विपक्षी भाजपा ने एक ही दिन विधेयक को पेश करने और पारित किए जाने को लेकर प्रक्रिया का विरोध किया। जिसे स्पीकर राम निवास गोयल ने खारिज कर दिया।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस पर तंज कसा कि विपक्ष हमारे दिन रात ईमानदारी से काम करने से डरता है। जीएसटी के सेक्शन 15 में संशोधन कर ऑडिट की अनिवार्यता खत्म की है और शेड्यूल 2 के पैराग्राफ 7 को हटा दिया गया है। यह संशोधन 39वींजीएसटी काउंसिल की बैठक में मंजूर किए गए थे।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन व्यापारियों की कठिनाइयों को कम करने, जीएसटी की प्रक्रिया को सुगम बनाने और उन सभी लोगों को जवाबदेह बनाने के लिए किया है जिन्होंने जीएसटी में फर्जीवाड़ा किया। लोगों से पैसे लिया लेकिन सरकार को नहीं दिया। यह प्रस्तावित संशोधन विधेयक उन सभी लोगों पर लगाम लगाएगा जो करकी चोरी करते हैं।
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अनिवार्य ऑडिट और रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट की अनिवार्यता खत्म सेक्शन 15 में व्यापारियों को अनिवार्य ऑडिट और रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट देना जरूरी था, जिससे उनकी सीए सीएस पर निर्भरता और खर्च बढ़ रहा था। अभी अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर अगर कोई जांच होती है और किसी कारणवश गाड़ी सीज हो जाती है तो पहले सामान तबछोड़ा जाता था जब व्यापारी टैक्स और जुर्माना दोनों देता था। अब सामान की कीमत पर जुर्माना देना होगा। टैक्स अलग से देना होगा।
रिटर्न देर से फाइल होने पर नेट अमाउंट पर लगेगा ब्याज पहले रिटर्न देर से फाइल होने की स्थिति में ग्रॉस अमाउंट पर ब्याज देना पड़ता था। अब केवल जो अमाउंट टैक्स लायबिलिटी के रूप में लियाजाएगा उस पर यानी नेट अमाउंट पर इंटरेस्ट लगेगा। ये व्यवस्था 1 जुलाई 2017से लागू होगी। जीएसटी संसोधन 2021 में आटीसी में गड़बड़ी को रोकने के लिए भी सख्ती की गई है और सरकार फर्जी फर्म स्थापित करने वाले लोगों की संपत्ति कुर्क करेगी। अभी इन मामलों में उस व्यक्ति पर कार्रवाई की जाती है जिसके नाम फर्म रजिस्टर्ड है लेकिन इस संशोधन के बाद फर्जीवाड़ा करने वाले मास्टरमाइंड लोगों पर भी गाज गिरेगी।
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R-1 में दाखिल कर भीटैक्स लायबिलिटी में शामिल ई-वे बिल के मामले मेंअभी गाड़ीपकड़े जाने पर डिस्प्यूटेड अमाउंट का 10% डिपॉजिट रखने का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 25% किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी में कुछ लोग जीएसटीआर-1 और3वीफॉर्म भरते समय में आर-1 में बढ़ी हुई राशि और 3वी में कम राशि दिखाते हैं। जब आईटीसी पास करने की बात आती है तो लोग अधिक बिक्री का दावा करते हैं लेकिन टैक्स भरने के दौरान कम बिक्री दिखाते हैं।इसके मद्देनजर अब से R-1 में दाखिल करो को भी टैक्स लायबिलिटी में शामिल किया जाएगा। संशोधन विधेयक को विधानसभा में पूर्ण बहुमत से पारित किया गया है।
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