गाजीपुर बॉर्डर पर लोक गीत के धुन पर रात भर थिरके किसान,आंदोलन में दिखा जोश

गाजीपुर बॉर्डर पर लोक गीत के धुन पर रात भर थिरके किसान,आंदोलन में दिखा जोश

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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों में रोष व्याप्त है। इसी कड़ी में दिल्ली से सटे गाजीपुर बार्डर पर राकेश टिकेत के नेतृत्व में सैंकड़ों किसान आंदोलन करने पर अड़े हुए है। जिससे मोदी सरकार लगातार बैकफुट पर है। उधर रात भर गाजीपुर बॉर्डर पर किसान लोक संगीत की धुनों पर नाचते रहे।

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बता दें कि गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार किसानों के आने का सिलसिला जारी है। हालांकि प्रशासन कार्यक्रम स्थल पर हर आने-जाने पर नजदीक से नजर रख रही है ताकि कोई आसामाजिक तत्व इसमें शामिल नहीं हो सकें। यहां तक कि प्रत्येक वाहन की जांच होने के बाद जाने की परमिशन दी जाती है। प्रशासन अवरोधक और कंटीली तार लगाकर सुरक्षा चाक-चौबंद कर दिया है।

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मालूम हो कि दिल्ली के सीमा पर गत 26 नवंबर से किसान कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर धरना पर बैठे है। इस दौरान केंद्र सरकार से भी 11 वें दौर तक की बातचीत हुई,लेकिन सभी बेनतीजा रहा। हालांकि इस आंदोलन को धक्का लगा जब गणतंत्र दिवस को लाल किला के प्राचीर पर धार्मिक झंडा फहराया गया। वहीं आईटीओ में उपद्रवकारियों ने ट्रैक्टर स्टंट करके दिल्ली पुलिस को पीछे धकेलने पर मजबूर कर दिया। जिससे देश भर में किसान आंदोलन के खिलाफ माहौल बना। लेकिन जल्द ही पासा पलट गया। राकेश टिकेत को गाजीपुर बॉर्डर पर गिरफ्तार करने गई पुलिस को तब खाली हाथ लौटना पड़ा जब मीडिया के सामने किसान नेता ने रोते हुए जनता से भावुक अपील कर दिया। उसके बाद से आंदोलन में जान आ गया है। वहीं सरकार भी अब बातचीत से मसले को हल पर जोर दे रही है।

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