नकली नोटों का धंधा देश में खतरनाक हद तक रहा फैल
Navodaya TimesEditorial
केंद्र सरकार ने काला धन और नकली करंसी समाप्त करने के लिए 8 नव बर, 2016 को 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करके 500 और 2000 रुपए के नए नोट जारी किए थे।
उस समय कहा गया था कि नई करंसी के सिक्योरिटी फीचर्स की नकल कर पाना जालसाजों के लिए आसान नहीं होगा परन्तु नोटबंदी लागू होने के तुरंत बाद नए 500 व 2000 रुपए वाले नकली नोटों के अलावा 100 रुपए और 200 रुपए वाले नकली नोट भी बाजार में आ गए। गत मात्र एक सप्ताह की अवधि में ही नकली करंसी के निम्र मामले सामने आए हैं : * 22 जून को मुरादाबाद के मूंढापांडे थाना की पुलिस ने 2 आरोपियों के पास से 7000 रुपए के नकली नोट पकड़े।
* 24 जून को बाराबंकी जिले में गोकुलपुर गांव के निकट नकली नोट बनाने वाले गिरोह के 4 सदस्यों को गिर तार करके उनके कब्जे से 2 लाख 11 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए गए।
* 27 जून को मध्य प्रदेश में बालाघाट पुलिस ने जिले के आदिवासी इलाके में 10 रुपए से लेकर 2,000 रुपए तक के 5 करोड़ रुपए मूल्य के नकली नोट जब्त करके इस सिलसिले में 8 लोगों को पकड़ा।
* 27 जून को भभुआ के रामपुर में बैंक के ए.टी.एम. से 500 रुपए का नकली नोट निकलने पर लोगों में घबराहट फैल गई।
* 27 जून को राजगढ़ में 2 युवकों के कब्जे से 2-2 हजार रुपए के नोटों के रूप में एक लाख रुपए की नकली करंसी जब्त की गई।
* 28 जून को ग्वालियर के बदनापुर में पुलिस ने एक व्यक्ति से 100 व 200 रुपए के नोटों के रूप में 4700 रुपए की नकली करंसी जब्त की। अधिकांश नोट एक ही सीरियल नंबर के होने से जालसाज पकड़ा गया। उक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि देश में वर्षों से चला आ रहा नकली नोटों का यह धंधा किस कदर गंभीर रूप धारण कर चुका है। अनेक मामलों में जब्त नकली नोटों की क्वालिटी इतनी अच्छी पाई गई कि उनके नकली होने का पता लगाना ही मुश्किल था जिससे पता चलता है कि नकली नोटों के व्यापारी अपने काम में कितना आगे बढ़ चुके हैं। अत: नकली करंसी के निर्माण या सप्लाई से जुड़े लोगों के विरुद्ध देशद्रोह के आरोप में कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि नकली करंसी पर रोक लग सके।
—विजय कुमार
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