SC का बड़ा फैसला- लाइफ पार्टनर की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने पर हो सकता है तलाक
Navodaya TimesKhabre
नई दिल्ली/टीम डिजिटल।इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख-शांति चाहता है। आज की जिंदगी में पैसों से सब कुछ खरीदा जा सकता है लेकिन खुशियां नहीं। ऐसे में हर कोई यही उम्मीद करता है कि उसका पार्टनर उसे सूकून भरी लाइफ दें, उसका सम्मान करें। हालांकि आजकल कुछ लोग अपने जीवनसाथी के मान-सम्मान को चोट पहुंचा देते हैं। ऐसे में लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अगर कोई भी अपने लाइफ पार्टनर के मान-सम्मान या प्रतिष्ठा को ठेसपहुंचाता है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जाएगा और यह तलाक का आधार भी बन सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को एक सैन्य अधिकारी का उसकी पत्नी से तलाक मंजूर करते हुए कहा कि जीवनसाथी के खिलाफ मानहानिकारक शिकायतें करना और उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना मानसिक क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति एस के कौल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि उत्तराखंड होई कोर्टने टूटे हुए संबंध को मध्यमवर्गीय वैवाहिक जीवन की सामान्य टूट-फूट करार देकर अपने निर्णय में त्रुटि की। पीठ ने कहा, 'यह निश्चित तौर पर प्रतिवादी द्वारा अपीलकर्ता के खिलाफ क्रूरता का मामला है और उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करने तथा परिवार अदालत के फैसले को बहाल करने के लिए पर्याप्त औचित्य पाया गया है।'
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जीवनसाथी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना मानसिक क्रूरता पीठ ने कहा, 'तदनुसार अपीलकर्ता अपनी शादी को खत्म करने का हकदार है और वैवाहिक अधिकारों की बहाली का प्रतिवादी का आवेदन खारिज माना जाता है। तदनुसार यह आदेश दिया जाता है।' सैन्य अधिकारी ने एक सरकारी स्नातकोत्तर कॉलेज में संकाय सदस्य अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाकर तलाक मांगा था। दोनों की शादी 2006 में हुई थी। वे कुछ महीने तक साथ रहे, लेकिन शादी की शुरुआत से ही उनके बीच मतभेद उत्पन्न हो गए और वे 2007 से अलग रहने लगे।
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ये न्यायमूर्ति थे मौजूद पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय भी थे। सैन्य अधिकारी ने अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसने विभिन्न जगहों पर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। कोर्टने कहा, 'जब जीवनसाथी की प्रतिष्ठा को उसके सहकर्मियों, उसके वरिष्ठों और समाज के बीच बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जाता है तो प्रभावित पक्ष से ऐसे आचरण को क्षमा करने की उम्मीद करना मुश्किल होगा।'
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