Death Anniversary: जिंदगी में देखी मात्र 2 फिल्में लेकिन बापू की इस फिल्म ने जीते 8 ऑस्कर अवॉर्ड

Death Anniversary: जिंदगी में देखी मात्र 2 फिल्में लेकिन बापू की इस फिल्म ने जीते 8 ऑस्कर अवॉर्ड

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नई दिल्ली/टीम डिजिटल।आज पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी को आज ही के दिन 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मार दी थी। ऐेसे में आज उनको याद करते हुए उनके बारे में कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जो शायद जिससे आप अनजान होंगे। महात्मा गांधी को फिल्मों से बिल्कुल भी लगाव नहीं था लेकिन उनकी जिंदगी पर बनी एक फिल्म ने 8 ऑस्कर अवॉर्ड जीते हैं।

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जीवन में देखी थी मात्र 2 फिल्में आजादी की लड़ाई में मुख्य यागदान देने वाले महात्मा गांधी को फिल्में बिल्कुल भी नहीं पसंद नहीं थी इसलिए उन्होंने अपनी जिंदगी में मात्र 2 फिल्में देखी थी जिसमें एक हिंदी भाषा और दूसरी विदेशी भाषा में थी। हिंदी फिल्म के बारे में बात करें तो महात्मा गांधी ने राम राज्य नाम की हिंदी फिल्म 2 जून 1944 को मुंबई में देखी थी।इस फिल्म का निर्देशन विजय भट्ट ने किया था। राम राज्य के बाद बापू ने दूसरी फिल्म मिशन टू मॉस्को देखी थी लेकिन इस फिल्म को देखकर वो थोड़ा निराश हो गए थे।

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उस फिल्म ने जीते 8 ऑस्कर अवॉर्ड महात्मा गांधी पर बनी फिल्म गांधी 1982 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में बेन किंग्सले ने गांधी जी का रोल निभाया था। इस फिल्म को 11 बार ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नोमिनेट किया था लेकिन इसने 8 बार ऑस्कर अवॉर्ड जीता है।

प्रार्थना सभा से उठ रहे बापू के सीने पर गोडसे ने मारी थी गोली राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम विनायक गोडसे ने की थी। गोडसे ने दिल्‍ली के बिड़ला भवन में शाम की प्रार्थना सभा से उठ रहे महात्मा गांधी के सीने पर तीन बार गोली चालकर उनकी हत्या कर दी थी। गांधी जी की मृत्यु की खबर से पूरा देश शोकाकुल था। पूरे देश में 30 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है। राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि पर उनके शहादत को याद करते हुए शहीद दिवस (Shaheed Diwas) मनाया जाता है।

Shaheed Diwas SPL: महात्मा गांधी के 15 अनमोल विचार, जो उनके न होने के बाद भी आज जीवित है गांधी जी ने मरते हुए कहा था ये दरअसल 30 जनवरी को ही गांधी जी ने करीब चार बजे सरदार पटेल से भी मुलाकात की थी औरसरदार पटेल की मुलाकात के बाद उन्हें पांच बजे प्रार्थना सभा में शामिल होना था, लेकिन गांधीजी और पटेल के बीच बातचीत पांच बजे के बाद भी जारी रही। पांच बजकर 10 मिनट पर बातचीत खत्महोने के बाद वे प्रार्थना सभा में चले गए, जो 15 मिनट देरी से शुरू हुई थी।हालांकि, जब गांधी जी प्रार्थना सभा पर उनके आसन तक जा रहे थे तो दोनों तरफ लोग उनका अभिवादन कर रहे थे। उसी वक्त जेब में रिवॉल्वर रखे नाथूराम गोडसे ने पहले गांधी से नमस्कार किया और फिर उनपर गोलियां चला दी। जिसके बाद उनकी मौत हो गई।ऐसा कहा जाता है कि गांधी जी की हत्या के वक्त उन्होंने 'हे राम' कहा था।

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नाथूराम गोडसे, महात्मा गांधी केफैसले के खिलाफ था कहा जाता है कि नाथूराम गोडसे, महात्मा गांधी के उस फैसले के खिलाफ था जिसमें वह चाहते थे कि पाकिस्तान को भारत की तरफ से आर्थिक मदद दी जाए। इसके लिए बापू ने उपवास भी रखा था। उसे यह भी लगता था कि सरकार की मुस्लिमों के प्रति तुष्टीकरण की नीति गांधीजी के कारण है।

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